रचों तुम अपने व्यूह प्रबल ।
न डीग पाएगी ये नींव सबल ।
आदर्शों ने जिसे पोषा हैं।
सिद्धान्तों का जो कोसा हैं ।
उसे कैसे हाराओगे।
जिसने तजा हर झरोखा हैं।।
अगर चुनौती जान इसे ।
रण में जो तुम आओगे।।
बेशक ये तो तय है।
कि मुह की ही तुम खाओगे।।
सौ बार गिरोगे उठ उठकर।
फिर भी चीख ना पाओगे।।
दर्द मिलेगा ऐसा ऐसा ।
जैसे भांति के व्यंजन।।
करना चाहो ना कर पाओगे।
फिर चाहो करना गुंजन।।
हार मिलेगा हारकर ।
वार मिलेगा वारकर।।
अनहद हार मिलेगा हारकर ।
वार अकस्मात मिलेगा बस घात कर।।
बस टकराना यह जानकर।
के अंजाम तुम्हारा क्या होगा ?
अंजाम तुम्हारा क्या होगा ?
Reviewed by Abhinav soni
on
8/03/2023
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