थे क्या ! क्या समझ बैठा....

तुम सन्ताप थे मेरा
 मैं प्रताप समझ बैठा
तुम राह थे वीरानी 
मैं मंजिल अनजान समझ बैठा
तुम खता थे मेरी 
मैं ......समझ बैठा ....

थे क्या ! क्या समझ बैठा.... थे क्या ! क्या समझ बैठा.... Reviewed by Abhinav soni on 8/03/2023 Rating: 5

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