यह तो बस दमन हैं प्यारे, अभी सुप्त पुरुष वो जाग्रत होगा भीतर दबी वासनाओं का पहरा नए निमित्त से अनाकृत होगाजो बच पाया ये माया के जंजाल सेतो फिर चेतना और माया से यह कृताकृत होगा।