ये तो दमन हैं...


यह तो बस दमन हैं प्यारे,
 अभी सुप्त पुरुष वो जाग्रत होगा 

भीतर दबी वासनाओं का पहरा 
नए निमित्त से अनाकृत होगा

जो बच पाया ये माया के जंजाल से
तो फिर चेतना और माया से

 यह कृताकृत होगा।

ये तो दमन हैं... ये तो दमन हैं... Reviewed by Abhinav soni on 8/03/2023 Rating: 5

Facebook

Blogger द्वारा संचालित.