अतिहर्ष भी एक उद्वेग यहाँ रे ।
इससे थोड़ा बचना प्यारे।।
ये चेतनता पे, ना पर्दा डाले,
सजगता के तू , पहरे ला ले ।।
जाग जा चेतना तुझे पुकारें ,
पल भर के उद्वेग हैं सारे।
खुशी - गम में हैं, फर्क कहाँ रे,
दोनों ही तो बाधा डाले।
ध्यान से तुझको दूर ले जाते,
बेहोशी के, पास है लाते।।
छीन जाता फिर, मंज़र सारा ,।
जब चढ़ता , हर्ष का पारा।।
लौट के जब तुम, आते वापिस ।
खुद को खोया पाते काफिर।।
अतिहर्ष भी तो उद्वेग हैं प्यारे....
Reviewed by Abhinav soni
on
8/03/2023
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