छिपा हैं मिलने में बिछड़ना ,और टूटना जुड़ने में ।गम छिपे हैं मुस्कराहट में ,और छिपी हैं खामोशी आहट में । तुम समझ सको, शब्द गर मौन में ,तो बढ़ना आगे, जोड़ना फिर ये धागे।