छिपा हैं ...


छिपा हैं मिलने में बिछड़ना ,

और टूटना जुड़ने में ।

गम छिपे हैं मुस्कराहट में ,

और छिपी हैं खामोशी आहट में । 

तुम समझ सको, शब्द गर मौन में ,

तो बढ़ना आगे, जोड़ना फिर ये धागे।


छिपा हैं ... छिपा हैं ... Reviewed by Abhinav soni on 9/24/2023 Rating: 5

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