अस्तित्व एक दर्पण सा ठहरा...

 जग मानो दर्पण सा ठहरा,

 मन की दीप्ति जैसी होती ।

उतना ही प्रतिबिंब भी गहरा...

अस्तित्व एक दर्पण सा ठहरा... अस्तित्व एक दर्पण सा ठहरा... Reviewed by Abhinav soni on 1/19/2024 Rating: 5

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