राही इस जीवन पथ पर चलना ,गिरना , गिरकर उठना लगा रहेगा।
ये क्रम बदलता रहेगा। कभी जीत होगी कभी हार होगी।
कभी नइया किनारे तो कभी मझधार होगी।
पर एक दिन जरूर आएगा जब ये नइया पार होगी।
बशर्ते तुम्हें चलना होगा।
कभी असफलता, निराशा देगी, तो कभी आशाएं थाम लेगी।
गिरना, उठना उठ के चलना लगा रहेगा।
हाँ ! बीते कल की छाप दिखाई देगी ; तुम्हारे आज में।
पर कर्म की कलम फिर देगी अवसर, तुम्हारा कल लिखने को।
अपने दाग मिटाने को। कर्म की कलम फिर देगी अवसर, आगे जाने को।
खुद को आजमाने को।
बशर्ते तुम्हें चलना होगा खुद को कदम-कदम पर गढ़ना होगा , आगे बढ़ना होगा।
क्योंकि मुश्किल यहां सब कुछ हैं पर नामुनकिन शायद कुछ नहीं।
हो सकता हैं जिस मंजिल की चाह हैं। वह इस राह से ,न मिले ।
पर काफ़िर तू निराश न होना। रास्ते कई मिल जाएंगे ;
जो मंज़िल तक ले जाएंगे बशर्ते हर बार रास्ते बदलना, मंज़िल नहीं ।
तभी जीत का परचम तेरे दामन में आएगा।
रास्तों में फ़ज़ीहत भी होगी और इबादत भी ।
कभी पलकों में बिठाया जाएगा तो कभी नज़रों से गिराया जाएगा।
लेकिन जीत का परचम तभी तेरे दामन आएगा।
जब च चलता जाएगा ...चलता जाएगा.....जिसे लोग पढ़ते हैं, उस इतिहास में तू लिखा जाएगा।
तेरा ही नाम होगा जो शीर्ष पर आएगा। बशर्ते राही तुझे चलना होगा । खुद को बदलना होगा।
आज कल से भी बेहतर करना होगा। तुझे चलना होगा ...तुझे चलना होगा.......
कर्म ही यहाँ तेरा भगवान साबित होगा। तभी जीवन पटल पर सुनहरा अंजाम काबिज़ होगा।
अपने भविष्य का आभास करना होगा , गलतियों का एहसास करना होगा।
मंज़िल तक जाने वाली हर एक सीढ़ियों पर चढ़ना होगा।
बशर्ते तुम्हें चलना होगा। फिर चाहे आंधीयां हज़ार हों। चाहें सुकून में मज़ार हों। तुम्हें चलना होगा।
क्योंकि यहां चलना ही विकल्प है, और रुकना मृत्यु।
मृत्यु ; सपनों की, मृत्यु तुम्हारे सुनहरे कल की, मृत्यु तुम्हारे संकल्प की।
मृत्यु तुम्हारे कर्म की। मृत्यु धर्म की। क्योंकि चलते जाना ही जीवन हैं।
राही यहाँ रुकना ही तो पाप है। और कर्महीनता ही अधर्म हैं। तो बस कर लें संकल्प आज , तू थमेगा नहीं, रुकेगा नहीं, चलता चलेगा, कभी झुकेगा नहीं । न परिस्थितयां झुका पाएंगी न किस्मत तुझे। बशर्ते तुझे चलना होगा।
Reviewed by Abhinav soni
on
3/06/2023
Rating:
