अस्तित्व ही तो घातक है
विलिनता ही तारक हैं
जो बचा सो बचेगा नहीं
जो डूब गया तो डूब पाएगा नहीं
अनामिका ये सरस् हैं
बस नीरस ही अंतिम रस हैं
जो सन्धान की गाथा गाएगा
तो बस साधन बन जाएगा
मंजिल की है क्या खबर
हर मंजिल तुझे बढ़ाएगी
एक मिली तो क्या
संग अनेक लाएगी
वर्तुल की इस तूल में
तू झूल ऐसा जाएगा
जान पड़ेगा दर्शित दरवाजा
पर हाथ कभी ना आएगा....
अस्तित्व ही तो घातक है....
Reviewed by Abhinav soni
on
7/30/2023
Rating:
Reviewed by Abhinav soni
on
7/30/2023
Rating:
