अनहद में बिसराम ,अनहद हो बिसराम....


सबै कोलाहल थाम रे संगी , सबै कोलाहल थाम ।
अनहद हो बिसराम रे संगी, अनहद हो बिसराम....
राम नाम इक नाम है संगी , बस हो जा तू गुमनाम ।
हरि भजन ही काम हैं संगी, बाकी सब बेकाम ....
अनहद में बिसराम रे संगी, चल अनहद हो बिसराम ।
प्रभू का ही तो काम हैं संगी ,प्रभु के ही ये नाम...
 चुन ले दरवाजा जो भाए , मिलेगा उसमें बस राम ।
 नामभेद में क्यू उलझा जाए, सबै यहां प्रभुनाम...
सबै यहाँ प्रभुनाम हैं संगी ,चुन लें अपना नाम।
फिर अनहद मे बिसराम रे संगी ,अनहद हो बिसराम....

अनहद में बिसराम ,अनहद हो बिसराम.... अनहद में बिसराम ,अनहद हो बिसराम.... Reviewed by Abhinav soni on 8/18/2023 Rating: 5

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