तब राम - कृष्ण हो जाएगा ....

 



लक्ष्य परम् को पाने में,  जब राम ; कृष्ण हो जाएगा


जब उद्वेगों का  कोलाहल रज -  रज के कहर बरपाएगा


मूल्य जब ना होंगे नैतिक ,  सौदा  आदर्शों का हो जाएगा


आएगी  वह घड़ी भी जब , वो खुद को मजबूर पाएगा । 


संकट में इस धर्म के फिर वो , अन्यत्र राह को जाएगा ।


जीवन जिसका था राहों पे, उन आदर्शों की भांति जो ।

अडिग अमर हुआ करते थे गिरी जैसे वैरागी हो।


के  हर  एक कतरा विचार का ।  

उस समंदर को, विचलित यूँ कर जाएगा ।


के गहरे उस अंतरतम में,   फिर एक कोलाहल आएगा ।

मूल्यों के द्वंद न जाने, होते कितने रोज़ यहाँ ।


अंतर्द्वंद्व की पूछो ना, ना बहिर्द्वंद हिसाब जहाँ।

कभी सभा में महाभारत का, ये बीज सिद्ध हो जाएगा ।


कही षडयंत्रो की तुरपाई से, वनवास को रस्ता जाएगा ।

मात-पिता  न रहे अछूते ,सखा - प्रेम  भी  जब छला जाएगा ।


आएगी ऐसी घड़ी भी फिर, नैतिकता के बाज़ारो में ।


तरकारी की भांति बिकेंगे , फिर  निशदिन वे सिद्धांत यहां   ||


तब गिरेंगे भाव मूल्य के, और मूल्य भाव का गिर जाएगा   |


फिर आदर्शो की ना पूछो गरिमा , उसका वर्ण - क्षुद्र हो जाएगा


मजबूरन यहां फिर एक राम, कृष्ण राह को आएगा


ना फिक्र होगी उसे पुकारे जाने की , उन छ्द्म नाम के नारों से ।।


जब सीना छल्ली हो जाएगा , उन कुठारों के वारों से। 

तो ना फर्क पड़ें उसे के , भरी सभा मे नैतिकता के।।


निर्वस्त्र किया वो जाएगा , छलिया कभी   ।  

 रणछोड़ कभी - कभी चोर भी वो कहलाएगा ।।


जो टूट चुके है पलड़े  धर्म धनुष  के  ,  कुत्सित   उन   विकारो से   ।


 न्याय की प्रत्यंचा उनमें   ,अब कौन चढ़ाने आएगा।।  


फिर    खण्डित     प्रत्याशा   में ,   धरम  के    उस   मसीहां  की ।


जब क्षुब्धता का तिरस्कृत उपहार  वो पाएगा । 


कि, तब नैतिकता की द्रौपदी के |

वस्त्र बचाने , ना दूजा कृष्णा यहां  फिर आएगा।।


 इस समस्या के निदान को, फिर  पाने समाधान को।

 जब वह अपना दीपक, खुद हो जाएगा ।।


फिर होके सवार कृष्ण रथ पे , वो तलवार अपनी उठाएगा ।

कि, नैतिकता की डोरी थामे , कब तक जीवित रह पाएगा ।।


के रण में इस जीवन के, वो हरदम कुचला जाएगा ।

मंशा से इस जब वो  , फिर  अन्यत्र राह को जाएगा ।।


की राह से इस नैतिकता की , जब  विचलित  वह हो जाएगा। परिणीति में तब राम - कृष्ण हो जाएगा । ।


के लक्ष्य परम् को पाने में ,जब आशँकित वो हो जायेगा ।  तब  विकल्प फिर आखिरी  वो अपनाएगा । ।


परिणीति में इसं संघर्ष की , फिर  राम - कृष्ण राह को  जाएगा । ।

तब राम - कृष्ण हो जाएगा .... तब राम - कृष्ण हो जाएगा .... Reviewed by Abhinav soni on 2/28/2023 Rating: 5

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