सब कुछ सजगता से पोषित हैं ....


सब कुछ सजगता से पोषित हैं ।

कुछ अघोषित हैं ,कुछ घोषित हैं ।।


कौन हैं यहां ऐसा जो ।

ना जीवन मंच पे शोषित हैं ।।


बतलाओ किरदार तो ऐसा ।

जो ना जग पर दोषित हैं ।।


हर जर्रा तो यहाँ मानो ।

लहराती  लौ सा जलता हैं ।।


पोषण का ये आलम हैं की।

 निशदिन धर्म बदलता है ।।


तब तो पोषण के अंगारों में ।

जीवन पल पल पकता हैं ।।


खुद मानव ही बिक गया हैं ।

अपने ही बाज़ारो में।।


चमकता चेहरा कोई बताओं ज़रा ।

इस जीवन के अंधियारे में ।।


जिसने कालिख ना देखी हो ।

खुदगर्जी के बाज़ारों में ।।


जो ना ठहरा  हो  शोषित ।

इस जीवन के गलियारों में ।।


शख़्स का ऐसे नाद सुनाओ ।

तुम उन उम्मीदों के बाजारों में ।।


कोई हैं यहां ? जो तोषित हैं ।

उन दो गुट से बगियारों में ।।


बस फर्क यही है दोनों की  ।

फितरत के पैमानों में ।।


हैं घोषित इच्छाएं कुछ की  ।

तो कुछ की यहाँ अघोषित हैं ।।


वरना दिखलाओ कोई ऐसा ।

जो नही यहां पर रोषित हैं  ।।


सब कुछ सजगता से पोषित हैं ।

कुछ अघोषित हैं ,कुछ घोषित हैं...

सब कुछ सजगता से पोषित हैं .... सब कुछ सजगता से पोषित हैं .... Reviewed by Abhinav soni on 8/31/2023 Rating: 5

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